जब CBSE Class 10 का रिज़ल्ट आता है, तो मार्कशीट पर सिर्फ नंबर नहीं — ग्रेड दिखते हैं। बहुत से छात्र और उनके माता-पिता A1 से E तक के ग्रेडिंग सिस्टम को लेकर भ्रमित रहते हैं। यह गाइड हर ग्रेड को सरल हिंदी में समझाती है — ग्रेड कैसे मिलता है, CGPA कैसे निकालें, और किस ग्रेड पर कौन सी stream मिल सकती है।

9ग्रेड लेवल (A1–D2 + E)
8बराबर हिस्से (पास छात्र)
D2न्यूनतम पास ग्रेड
Eएकमात्र फेल ग्रेड

CBSE 9-पॉइंट ग्रेडिंग स्केल (रिलेटिव)

CBSE किसी तय नंबर पर ग्रेड नहीं देता। बजाय इसके, उस विषय में पास हुए सभी उम्मीदवारों को रैंक किया जाता है और 8 बराबर हिस्सों में बाँटा जाता है — हर हिस्से को एक ग्रेड मिलता है। इसे रिलेटिव ग्रेडिंग कहते हैं।

पास छात्रों में रैंकिंगग्रेडग्रेड पॉइंटविवरण
टॉप 1/8A110उत्कृष्ट (Outstanding)
अगले 1/8A29बेहतरीन (Excellent)
अगले 1/8B18बहुत अच्छा (Very Good)
अगले 1/8B27अच्छा (Good)
अगले 1/8C16औसत से ऊपर (Above Average)
अगले 1/8C25औसत (Average)
अगले 1/8D14पास (Pass)
नीचे का 1/8 (पास में)D23पास — न्यूनतम (Minimum Pass)
फेल छात्रEEssential Repeat (फेल)

⚠️ ज़रूरी बात: A1 से D2 तक के सभी आठ ग्रेड पास के संकेत हैं। Grade E — Essential Repeat — एकमात्र फेल ग्रेड है। CBSE मार्कशीट पर "Pass" या "Fail" नहीं लिखा जाता; किसी भी विषय में E ग्रेड फेल का संकेत है। पाँचों विषयों में कम से कम Grade D2 होना जरूरी है।

ग्रेड कैसे तय होता है?

हर विषय में आपके Theory + Internal Assessment के नंबर जोड़कर 100 में से कुल स्कोर बनता है। CBSE फिर उस विषय में पास हुए सभी छात्रों को राष्ट्रीय स्तर पर रैंक करता है और रैंकिंग को 8 बराबर हिस्सों में बाँटता है — हर हिस्से को A1 से D2 तक एक ग्रेड मिलता है। फेल छात्रों को Grade E मिलता है।

उदाहरण: एक छात्र को Science Theory में 72/80 और Internal Assessment में 15/20 मिले = कुल 87/100। अब CBSE Science में पास हुए सभी छात्रों को रैंक करता है। अगर यह छात्र टॉप 1/8 में है — तो A1; अगले 1/8 में है — तो A2; और इसी तरह आगे। ग्रेड इस बात पर निर्भर करता है कि पूरे देश में छात्रों ने कैसा प्रदर्शन किया।

यही कारण है कि एक ही नंबर पर अलग-अलग साल अलग ग्रेड आ सकता है — ग्रेड राष्ट्रीय प्रदर्शन के सापेक्ष होता है।

ग्रेडिंग प्रत्येक विषय के लिए अलग-अलग होती है — कोई एक "overall grade" नहीं होता। CGPA (Cumulative Grade Point Average) खुद निकाला जा सकता है — CBSE Phase 1 मार्कशीट पर combined CGPA नहीं छापता, केवल individual subject grades दिखते हैं।

हर ग्रेड का stream selection पर क्या असर पड़ता है?

मुख्य विषयों में ग्रेडसंभावित Stream विकल्प
Science और Maths में A1/A2Science PCM, Science PCB — टॉप स्कूलों सहित सभी विकल्प
Science और Maths में B1/B2अधिकतर स्कूलों में Science PCM/PCB, Commerce with Maths
Science में C1/C2Commerce, Arts; कम selective स्कूलों में Science भी संभव
किसी विषय में D ग्रेडपास — अधिकतर stream विकल्प खुले, लेकिन competitive Science school कठिन
किसी विषय में Grade EEssential Repeat (फेल) — stream selection से पहले resolve करना जरूरी

CGPA — क्या होता है और कैसे निकालें

CGPA (Cumulative Grade Point Average) आपके सबसे अच्छे 5 विषयों के ग्रेड पॉइंट का औसत है:

CGPA = (5 विषयों के ग्रेड पॉइंट का योग) ÷ 5

CGPA को approximate percentage में बदलने का फॉर्मूला: Percentage ≈ CGPA × 9.5 (यह CBSE का आधिकारिक फॉर्मूला है)।

उदाहरण: 5 विषयों के ग्रेड पॉइंट: A1(10) + A2(9) + B1(8) + B2(7) + A2(9) = 43। CGPA = 43 ÷ 5 = 8.6। Approximate percentage = 8.6 × 9.5 = 81.7%

ℹ️ नोट: CGPA × 9.5 फॉर्मूला एक अनुमान देता है, सटीक प्रतिशत नहीं। Best of 5 Rule को ध्यान में रखते हुए सटीक प्रतिशत के लिए हमारा CBSE Percentage Calculator उपयोग करें।

Internal Assessment — ग्रेड पर कैसा असर डालता है?

Internal Assessment (IA) स्कूल द्वारा दिया जाता है और 100 में से 20 नंबर का होता है। स्कूल periodic tests, practicals, projects और activities आयोजित करते हैं। मुख्य बातें:

Grade E आए तो क्या होगा?

Grade E (Essential Repeat) CBSE Class 10 का एकमात्र फेल ग्रेड है। यह उन छात्रों को मिलता है जो किसी विषय में फेल हो जाते हैं। E1 या E2 जैसा कोई ग्रेड नहीं है — केवल एक E है।

🔴 ध्यान दें: मार्कशीट पर "Fail" नहीं लिखा होता — लेकिन किसी भी विषय में Grade E का मतलब है उस विषय में फेल। Grade E आने पर उस विषय की दोबारा परीक्षा देनी होती है।

2025-26 बैच के लिए Phase 2 सुधार परीक्षा (मई 15 – जून 1, 2026) में Grade E क्लियर करने और पूरे साल को दोबारा करने से बचने का मौका है। पात्रता के लिए अपने स्कूल और CBSE कार्यालय से जरूर पूछें।

पास होने के लिए: सभी पाँच विषयों में Grade D2 या उससे ऊपर होना जरूरी है। किसी एक विषय में D2 मिलना फेल नहीं है — D2 न्यूनतम पास ग्रेड है।

IT 402 का ग्रेड प्रोफाइल पर क्या असर पड़ता है?

अगर आपको IT 402 में A1 मिला लेकिन Maths में केवल B2, तो Best of 5 Rule के तहत IT 402 Maths की जगह ले सकता है — जिससे आपकी कुल प्रतिशत बेहतर होगी। मार्कशीट पर individual subject grades नहीं बदलते, लेकिन admission और scholarship में इस्तेमाल होने वाली aggregate percentage सुधर जाती है। और पढ़ें: CBSE Best of 5 Rule हिंदी में

Phase 2 में ग्रेड कैसे सुधारें?

Phase 2 सुधार परीक्षा (मई 15 – जून 1, 2026) में हर ग्रेड सुधार मायने रखता है: Science में B2 से B1 होना आपकी पसंदीदा स्कूल में Science stream मिलने और न मिलने के बीच का फर्क हो सकता है। ग्रेडिंग रिलेटिव है इसलिए कोई fixed cutoff नहीं है — जितने ज्यादा नंबर आएंगे, राष्ट्रीय रैंकिंग में स्थान उतना ऊँचा होगा।

सबसे अच्छी रणनीति: हर विषय में अधिकतम नंबर लाने की कोशिश करें। हर अतिरिक्त नंबर आपकी रैंक सुधारता है — और ऊँचा ग्रेड मिलने की संभावना बढ़ाता है। MCQ practice से शुरुआत करें।